हाँ कहने को इंसान है हम

हाँ कहने को इंसान है हम

हाँ कहने को इंसान है हम,
दिल्ली, मेरठ,
कठुआ ,उन्नाव। ….
हर शहर को करते दाग दाग है हम,
हाँ कहने को इंसान है हम |

अपनी बहन से बंधवा कर राखी ,
रक्षा की कसम हम खाते है,
फिर दूजे ही पल देख, किसी और बहन को
हर वचन भूल हम जाते है |

है सम्मान बहुत हर बेटी का,
यूँ तो बातें बड़ी, हमे आती है,
लेकिन फिर क्यों वो आखँ नहीं,
जो बहनो को बुरी नज़र से बचाती है |

कभी शब्दो से, कभी नज़रो से ..
ओर ना जाने किन किन हटकन्दो से,
करते नारी का अपमान हैं हम,
हाँ कहने को इंसान है हम |

जाने कितनी दामिनी, ना जाने कितनी निर्भाया…
आयीं और कितनी आएँगी ….
और ना जाने कितनी आसिफा
राजनीती की भेंट चढ़ जाएँगी ….
देख तमशा इस सर्कश का
बस जिन्दा लाश बन रह जायेंगे
हाँ कहने को फिर भी हम तो, इंसान ही कहलायेंगे

है दम घुटता हर नारी का,
जब भी वो बहार आती है,
देख नज़ारा इस दुनिया का
वो नारी बन पछताती है

नहीं बनता फ़र्ज़ हमारा भी,
हर नारी को सम्मान मिले
है जीने का हक उसको भी
उसके पंखो को भी उड़ान मिले

जिस दिन पिता किसी बेटी का
बेफिक्र हो रात सो जायेगा
तब होगी सुबह, हर इंसान की
तब वो इन्सान कहलायेगा
और बातों में नहीं, हकीकत मे भी
हर शक्श इंसान कहलायेगा

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इंतज़ार – Waiting For Your Love

इंतज़ार- Waiting For Your Love

बदलता रहा करवटें मैं सारी रात भर…
ना आई नींद मुझे सारी रात भर|

ना जागा ना सोया…
ना जाने था किन खयालों मे खोया,
सारी रात भर|

ख्वाब तो देखे..
पर ना झपकी मेरी पलक,
सारी रात भर|

थी ख्वाबों में,
सांसों में,
हर आहट मे मेरी….
फिर भी न जाने क्यूं करता रहा
इंतेतेज़ार मैं सारी रात भर|

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